Title: Folk culture and social change in regional Hindi literature Download
Author’s : Hanuman
Date of Publication (ONLINE) :-19-09-2025
DOI :-10.71037/gyanvividha.v2i3.52
Online Publication Certificate No. :– GV/2352
cite this article:
Hanuman. ”Folk culture and social change in regional Hindi literature”, Published in GYANVIVIDHA, ISSN: 3048-4537(O) & 3049-2327 (P), Volume-2 | Issue- 2, July-Sept, 2025, Page No. :-432-437. URL: https://journal.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/05/Hanuman-Gyanvividha-vol2-issue-3ISSN-3048-4537O-3049-2890O-july-Sept.-2025-pp-432-437.pdf
Abstract : यह शोधपत्र आंचलिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख उपन्यासों फणीश्वरनाथ रेणु के मैला आँचल और परती परिकथा, नागार्जुन के बलचनमा, रांगेय राघव के कब तक पुकारूँ, राही मासूम रज़ा के आधा गाँव, विवेकी राय के सोना माटी तथा श्रीलाल शुक्ल के राग दरबारी के आधार पर यह प्रतिपादित करता है कि लोक-संस्कृति आंचलिक साहित्य में केवल रंग-रोगन या लोक-चित्रमाला नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ की जीवित संवहिनी है। इन कृतियों में अंचल किसी भूगोल का स्थिर मानचित्र नहीं, बल्कि जाति, वर्ग, धर्म, श्रम, स्मृति, बोली, मिथक, रीति, उत्सव, नैतिकता और सत्ता-संबंधों से निर्मित एक जटिल सांस्कृतिक परिसर है। यही कारण है कि यहाँ लोक-संस्कृति और सामाजिक परिवर्तन परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि द्वंद्वात्मक सहचर के रूप में उपस्थित होते हैं। एक ओर लोक-जीवन का सांगीतिक, उत्सवी, सामुदायिक और प्रकृतिनिष्ठ पक्ष दिखाई देता है; दूसरी ओर जमींदारी अवशेष, विकास-राजनीति, साम्प्रदायिक तनाव, स्त्री-देह का वस्तुकरण, शिक्षा की असमानता, ग्राम्य राजनीति का क्षरण और नैतिक विघटन भी सामने आते हैं। इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि आंचलिक हिन्दी साहित्य भारत के ग्रामीण समाज को ‘पिछड़ेपन’ की जड़ छवि में नहीं बाँधता; वह उसके भीतर चल रही परिवर्तन-प्रक्रियाओं, प्रतिरोधों और नई चेतनाओं को उजागर करता है। इस अर्थ में आंचलिक साहित्य स्थानीय होकर भी राष्ट्रीय अनुभव का संवेदनशील रूपक बन जाता है।
Keywords : आंचलिकता, लोक-संस्कृति, सामाजिक परिवर्तन, ग्राम्य जीवन, हिन्दी उपन्यास, लोकभाषा, ग्रामीण चेतना, स्वातंत्र्योत्तर साहित्य।
Publication Details:
Journal : GYANVIVIDHA (ज्ञानविविधा)
ISSN : 3048-4537 (Online)
3049-2327 (Print)
Published In : Volume-2 | Issue-3, July-Sept., 2025
Page Number(s) : 432-437
Publisher Name :
Mrs Anubha Chaudhary | https://journal.gyanvividha.com | E-ISSN 3048-4537 | P-ISSN 3049-2327



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