Title :-The depiction of family disintegration and individual crisis in Hindi drama Download
Author :-Hanuman
DOI-10.71037/gyanvividha.v2i2.24
cite this article:
Hanuman, ”The depiction of family disintegration and individual crisis in Hindi drama”, Published in GYANVIVIDHA, ISSN: 3048-4537(O) & 3049-2327 (P), Volume-2 | Issue- 2, Apr.-June 2025, Page No. :-156-160. URL: https://journal.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/05/Hanuman-Gyanvividha-vol2-issue-2ISSN-3048-4537O-3049-2890O-Apr.-June-2025-pp156-160.pdf
Abstract : यह शोधपत्र स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी नाटक में परिवार के विघटन और व्यक्ति के आंतरिक संकट के परस्पर संबंध का साहित्यिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का केंद्र मोहन राकेश के आधे-अधूरे और आषाढ़ का एक दिन तथा मन्नू भंडारी के बिना दीवारों के घर जैसे नाटक हैं, जिनमें घर केवल निवास-स्थल नहीं, बल्कि तनाव, असुरक्षा, असंतोष, लैंगिक असमानता, अधूरी आकांक्षाओं और आत्म-विक्षेप का सक्रिय रंग-परिदृश्य बन जाता है। शोध का मूल निष्कर्ष यह है कि हिन्दी नाटक में पारिवारिक विघटन किसी बाहरी सामाजिक घटना भर का चित्रण नहीं है; वह आधुनिक मनुष्य के भीतर की टूटन, अकेलेपन, विस्थापन और असफल आत्म-खोज का नाट्य-रूप है। इन नाटकों में स्त्री पात्र घर की केन्द्रीय धुरी बनते हुए भी सबसे अधिक संकटग्रस्त दिखाई देती है, जबकि पुरुष पात्र प्रायः विफल आत्मगौरव, संशय, पलायन और आंतरिक दुर्बलता के वाहक बनते हैं। इस प्रकार परिवार और व्यक्ति दोनों की त्रासदी एक-दूसरे की व्याख्या करती हुई सामने आती है।
Keywords : हिन्दी नाटक, पारिवारिक विघटन, व्यक्ति-संकट, स्वातंत्र्योत्तर संवेदना, मध्यवर्ग, मोहन राकेश, मन्नू भंडारी, नाट्यभाषा, स्त्री-अस्मिता, अंतर्द्वन्द्व।
Publication Details:
Journal : GYANVIVIDHA (ज्ञानविविधा)
ISSN : 3048-4537 (Online)
3049-2327 (Print)
Published In : Volume-2 | Issue-2, Apr.-June 2025
Page Number(s) : 156-160
Publisher Name :
Mrs Anubha Chaudhary | https://journal.gyanvividha.com | E-ISSN 3048-4537 | P-ISSN 3049-2327




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