Title: Valmiki ramayan mein Mulyadharit Jivan-Prabandhan ke Siddhant Download
Author’s : Dr. Devendra Singh Rajput
Date of Publication (ONLINE) :-19-03-2026
Online Publication Certificate No. :- GV/3165
DOI :-10.71037/gyanvividha.v3i1.65
cite this article:
Rajput Dr. Devendra Singh. ”Valmiki ramayan mein Mulyadharit Jivan-Prabandhan ke Siddhant”, Published in GYANVIVIDHA, ISSN: 3048-4537(O) & 3049-2327 (P), Volume-3 | Issue-1, Jan.=March, 2026, Page No. :-515-521. URL : https://journal.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/09/Dr.-devendra-singh-rajput-Gyanvividha-Jan.-March2026-pp-515-521.pdf
Abstract : वाल्मीकि रामायण भारतीय संस्कृति, जीवन-दृष्टि एवं मानवीय मूल्यों का आकर ग्रन्थ है। यद्यपि यह आदिकाव्य मुख्यतः रामकथा के रूप में प्रसिद्ध है तथापि इसके विभिन्न प्रसंगों में व्यक्ति, परिवार, समाज तथा संगठन के समुचित संचालन के लिए जीवन-प्रबन्धन पर आधारित अनेक सिद्धान्त निहित हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में वाल्मीकि रामायण के चयनित प्रसंगों एवं श्लोकों के आधार पर मूल्याधारित जीवन-प्रबन्धन की प्रमुख अवधारणाओं का विवेचन एवं विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में सत्यनिष्ठा, त्याग, तपस्या, प्रतिज्ञा एवं कर्त्तव्यपालन, लक्ष्य-निष्ठा, कार्य-प्रतिबद्धता, आत्मविश्वास, धैर्य, साहस, नेतृत्व, कुशल संवाद, समस्या-समाधान, रणनीतिक चिन्तन तथा परिस्थितिनुकूल व्यवहार जैसे जीवन-प्रबन्धन के आयामों को रेखांकित किया गया है। वाल्मीकि रामायण में प्रतिपादित प्रसंगों के आधार पर जीवन-प्रबन्धन के सिद्धान्तों के सम्बन्ध में उनकी उपादेयता को बताया गया है। ये सिद्धान्त वर्तमान जीवन शैली में आधुनिक व्यक्तिगत, सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन के लिए अत्यन्त प्रासंगिक और अनुकरणीय हैं।
Keywords : जीवनमूल्य, नेतृत्व, कुशल संवाद, प्रबन्धन, जीवन प्रबन्धन, रामायण में प्रबन्धन ।
Publication Details:
Journal : GYANVIVIDHA (ज्ञानविविधा)
ISSN : 3048-4537 (Online)
3049-2327 (Print)
Published In : Volume-3 | Issue-1, Jan.-March, 2026
Page Number(s) : 515-521
Publisher Name :
Mrs Anubha Chaudhary | https://journal.gyanvividha.com | E-ISSN 3048-4537 | P-ISSN 3049-2327
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