Hindi Sahity Me Narivad Ka Svarup

Title: Hindi Sahity Me Narivad Ka Svarup Download

Author’s : Dr. Sweta Dipti

(डॉ. श्वेता दीप्ति)

अध्यक्ष, हिन्दी केन्द्रीय विभाग,
त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू, नेपाल.

Date of Publication (ONLINE) :-11-07-2026
DOI :-10.71037/gyanvividha.v3i3.17
Online Publication Certificate No. :- GV/3317

cite this article:
Dipti Dr. Sweta.Hindi Sahity Me Narivad Ka Svarup”, Published in GYANVIVIDHA, ISSN: 3048-4537(O) & 3049-2327 (P), Volume-3 | Issue-3, July-Sept., 2026, Page No. :-111-117. URL : https://journal.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/08/Dr.-Shweta-dipti-Gyanvividha-Vol-3-Issue-3-July-Sept.-pp-111-117.pdf

Abstract : आज के मुख्यधारा नारीवाद की प्रकृति–प्रवृत्ति चाहे जो भी हो,  औरत की प्रकृति–प्रवृत्ति अपने शोषण के पहले दिन से ही प्रतिरोध कर रही है और आज भी है। औरत एक जिन्दा मनुष्य है जिसने जड़ता के किसी भी हमले के सामने घुटने टेकना नहीं सीखा है। औरत दुनिया के हर कोने में प्रतिरोध कर रही है। इसके लिए वह परम्परागत प्रतिरोध संघर्ष के रूपों रास्तो के साथ साथ नयी पहलकदमियों की राह भी बना रही है।

            माना गया है कि नारीवाद की परिकल्पना पश्चिम की देन है।  नारीवादी लेखन की शुरुआत भी वहीं से हुई है। किन्तु इसी संदर्भ में अगर हिन्दी साहित्य की चर्चा की जाए तो हिन्दी साहित्य में महादेवी वर्मा कृत ‘शृंखला की कडि़याँ’ नारीवादी लेखन के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेजÞ है। मध्यकालीन साहित्य में अगर देखें तो अक्क महादेवी,  मीरा आदि ऐसी समर्थ लेखिका हुईं हैं जिनकी रचनाएँ नारीवादी लेखन के पर्याय हैं। नारीवादी लेखन की परम्परा को वर्तमान समय में कई समर्थ लेखक–लेखिकाओं ने अत्यंत सशक्त और सार्थक बनाया है।

नारीवादी लेखन की दृष्टिकोण से हिन्दी का उपन्यास और कथा–साहित्य अत्यंत समृद्ध और सार्थक है। इस्मत चुगताई के ‘कागजी है पैरहन’ से भारतीय नारीवादी लेखन का प्रारंभ माना जा सकता है। उपन्यास एवं कथा साहित्य में  साठोत्तरी हिन्दी नारीवादी लेखन में जो नाम बुलंदियों को छूते हैं,  उन में कृष्णा सोबती,  मृदुला गर्ग,  उषा प्रियंवदा,  मन्नू भंडारी,  प्रभा खैतान,  मैत्रेयी पुष्पा,  ममता कालिया,  चित्रा मुद्दगल,  राजी सेठ,  नासिरा शर्मा,  कृष्णा अग्निहोत्री,  शशिप्रभा शास्त्री,  सूर्यबाला,  कुसुम अंसल,  कमल कुमार,  अलका सरावगी,  मेहरुन्निसा परवेज,  लवलीन,  लता शर्मा,  गीतांजलिश्री,  कृष्ण बलदेव वैद,  सुरेन्द्र वर्मा,  चन्द्रकान्ता,  सत्येनकुमार,  तहमीना दुर्रानी आदि महत्त्वपूर्ण नाम  हैं। जिनका साहित्य नारीवादी लेखन का आधार स्तम्भ है। प्रस्तुत आलेख में नारीवादी लेखन पर संक्षिप्त चर्चा की गई है।

Keywords : नारीवाद,  सशक्तिकरण,  महिला लेखन,  नारी शोषण,  पुरुष वर्चस्व।

Publication Details:

Journal : GYANVIVIDHA (ज्ञानविविधा)

ISSN : 3048-4537 (Online)

3049-2327 (Print)

Published In : Volume-3 | Issue-3, July-Sept., 2026

Page Number(s) : 111-117

Publisher Name :

 Mrs Anubha Chaudhary | https://journal.gyanvividha.com | E-ISSN 3048-4537 | P-ISSN 3049-2327

Loading Viewer…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *