Title: Globalization and Cultural Crisis in Twenty-First-Century Hindi Literature Download
Author’s : Prashant Kumar singh
Date of Publication (ONLINE) :-19-03-2026
Online Publication Certificate No. :- GV/3159
DOI :-10.71037/gyanvividha.v3i1.59
cite this article:
singh Prashant Kumar. ”Globalization and Cultural Crisis in Twenty-First-Century Hindi Literature”, Published in GYANVIVIDHA, ISSN: 3048-4537(O) & 3049-2327 (P), Volume-3 | Issue-1, Jan.=March, 2026, Page No. :-472-479. URL : https://journal.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/07/Prashant-kumar-singh-Gyanvividha-vol3-issue-1-Jan.-March-2026-pp-472-479.pdf
Abstract : इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भिक दशकों में भारतीय समाज और संस्कृति ने वैश्वीकरण, उदारीकरण और बाज़ारवाद के प्रभाव स्वरूप एक अभूतपूर्व और आमूलचूल परिवर्तन का अनुभव किया है। प्रस्तुत शोध-पत्र समकालीन हिन्दी साहित्य, विशेषकर इक्कीसवीं सदी के कथा-साहित्य के परिप्रेक्ष्य में वैश्वीकरण द्वारा उत्पन्न सांस्कृतिक संकट, मूल्य-क्षरण और सामाजिक विखंडन का गहन आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। जहाँ एक ओर वैश्वीकरण ने विश्व को तकनीकी और आर्थिक स्तर पर निकट लाते हुए एक ‘वैश्विक ग्राम’ में तब्दील कर दिया है, वहीं दूसरी ओर इसने भारतीय समाज में उपभोक्तावाद, महानगरीय अजनबीपन, पारिवारिक विघटन, आदिवासी विस्थापन और नैतिक पतन जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दिया है। यह शोध-पत्र काशीनाथ सिंह के ‘रेहन पर रग्घू’, रणेंद्र के ‘ग्लोबल गाँव के देवता’, प्रदीप सौरभ के ‘मुन्नी मोबाइल’, और उदय प्रकाश की प्रमुख कथा-रचनाओं के माध्यम से इस बात की पड़ताल करता है कि समकालीन साहित्य किस प्रकार नव-पूंजीवादी शक्तियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नव-उपनिवेशवाद और तकनीकी विस्तार के कारण हाशिए पर धकेले जा रहे मानव मूल्यों और अस्मिताओं का प्रामाणिक दस्तावेज़ बन गया है। इसके अतिरिक्त, यह अध्ययन वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी भाषा के बदलते स्वरूप, ‘हिंग्लिश’ के उद्भव, स्त्री-विमर्श की नई दिशाओं, और वैश्विक पटल पर हिन्दी साहित्य की नई चुनौतियों व अवसरों का भी सांगोपांग विवेचन करता है।
Keywords : वैश्वीकरण, सांस्कृतिक संकट, बाज़ारवाद, उपभोक्तावाद, नव-उपनिवेशवाद, आदिवासी विमर्श, पीढ़ीगत द्वंद्व, विस्थापन, समकालीन हिन्दी साहित्य, अस्मिता का संकट।
Publication Details:
Journal : GYANVIVIDHA (ज्ञानविविधा)
ISSN : 3048-4537 (Online)
3049-2327 (Print)
Published In : Volume-3 | Issue-1, Jan.-March, 2026
Page Number(s) : 472-479
Publisher Name :
Mrs Anubha Chaudhary | https://journal.gyanvividha.com | E-ISSN 3048-4537 | P-ISSN 3049-2327
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