Title: The changing Psychology of Middle-Class Loneliness in Hindi Stories Download
Author: Monika parihar
DOI-10.71037/gyanvividha.v2i1.40
cite this article:
parihar Monika ”The changing Psychology of Middle-Class Loneliness in Hindi Stories”, Published in GYANVIVIDHA, ISSN: 3048-4537 (O) & 3049-2327 (P), Volume-2 | Issue-1 , Jan.-March 2025, Page No. :-242-247. URL: https://journal.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2025/03/Gurpal-singh-Gyanvividha-vol2-issue-1ISSN-3048-4537O-3049-2327P-Jan.-March-2025-pp88-94.pdf
Abstract : यह शोध-पत्र हिन्दी कहानी में मध्यवर्गीय अकेलेपन के बदलते मनोविज्ञान की पड़ताल नई कहानी से उत्तर-आधुनिक कथा-लेखन तक करता है। इसका मूल तर्क यह है कि हिन्दी कथा-साहित्य में अकेलापन पहले पारिवारिक विघटन, दाम्पत्य की चुप्पी, नौकरी और नगर-जीवन की अनामिता से निर्मित भाव-दशा के रूप में उभरता है; पर उत्तर-आधुनिक संवेदना में वही अकेलापन स्त्री-अनुभव, देह-चेतना, स्मृति, इच्छा, आत्म-संदेह और अस्मिताबोध की जटिल संरचना बन जाता है। इस अध्ययन में वापसी, यही सच है, धूप का एक टुकड़ा, परिन्दे, मित्रो मरजानी, चित्तकोबरा और माई जैसी कृतियों को केंद्र में रखकर यह दिखाया गया है कि मध्यवर्गीय व्यक्तित्व का अकेलापन केवल सामाजिक नहीं, बल्कि गहरे मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक अर्थों में भी निर्मित होता है। शोध-विधि के रूप में निकट-पाठ, स्त्रीवादी आलोचनात्मक दृष्टि तथा मनो-सामाजिक विश्लेषण का उपयोग किया गया है। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि उत्तर-आधुनिक हिन्दी कथा में अकेलापन अब केवल “रिक्तता” नहीं रह जाता; वह देह, भाषा, स्मृति और सत्ता-संबंधों से निर्मित अनुभव-तंत्र बन जाता है।
Keywords : हिन्दी कहानी, मध्यवर्ग, अकेलापन, मनोविज्ञान, नई कहानी, उत्तर-आधुनिकता, स्त्री-अनुभव, देह-चेतना, दाम्पत्य, शहरी जीवन।
Publication Details:
Journal : GYANVIVIDHA (ज्ञानविविधा)
ISSN : 3048-4537 (Online)
3049-2327 (Print)
Published In : Volume-2 | Issue-1, Jan.-March 2025
Page Number(s) : 242-247
Publisher Name :
Mrs Anubha Chaudhary | https://journal.gyanvividha.com | E-ISSN 3048-4537 | P-ISSN 3049-2327




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